​ये ठंडी हवा की लहर न जाने क्या लाइ है …

ये ठंडी हवा की लहर न जाने क्या लाइ है …

दरवाज़े पर नही ,खीडकी से ही दस्तक लाइ है…

पुछा मैने उस से,”अरे कौन है यार?? और क्यो आइ है…

किसी को साथ नही लाइ??? क्या अकेली आइ है??”

 

कहने लगी, “जरा साँस तो ले लेने दे यार, बडी दूर से आइ हुँ…

अकेली नही आइ, इन बारिश की बुंदो को संग लाइ हुँ…

तेरी बगीया की हरियली के साथ आइ हुँ…

तेरे लिये एक मीठा सा सन्देसा लाइ हुँ..”

 

मै बोला ,”इतनी दुर से क्या तु सिर्फ मेरे  लिये आई है??

शायद इसिलिये मुझे तू  इतनी भाइ है…

तेरी बाते सुनकर तो दिल में एक कहर सी आई है..

चल जल्दी से बता कैसा सन्देसा लाइ है…”

 

उसने कहा ,”तेरे लिये तो मैं आने वाली खुशियों का पैगाम लाइ हुँ…

फुलो की बौचरों के साथ अरमानो की टोकरी लाइ हुँ…

कुछ खट्टे मीठे किस्सो को अपने संग लाइ हुँ…

‘ख्वाब सजा’, तुझे ये कहने आइ हुँ…”

 

मैं बोला ,”तेरा सन्देसा मेरे लिये उम्मिदो की नयी किरण लाया है…

थोडी देर के लिये ही सही, मगर खुशियों की जैसे एक बौछार लाया है..

तेरे आने से ही इस दिल को सुकुन और चैन आया है..

तुझे सदा के लिये रोक लु अपने पास ऐसा खयाल आया है…

 

-Gaurav Toshniwal

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